Sunday, 25 January 2026

संघ की आत्मा को तोड़ने का काम यूजीसी

शिक्षा में भारतीयकरण के लिए 1960 में "भारतीय शिक्षण मंडल" का गठन हुआ था संस्था का मत था कि शिक्षा में अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक जैसे भेद नहीं होने चाहिए. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह सोच रही है कि समाज की नींव सर्व समाज समता  मूलक ही रहनी चाहिए जहां जाती में कोई भी भेद न हो,मैं आपको अपने बचपन की कहानी बताता हूं, जब मैं स्कूल व विश्वविद्यालय में पढ़ता थ तो मुझे पता नहीं रहता था कि मेरा प्रिय मित्र किस जाति से आता है हम लोग साथ खाते पीते और खेलते थे, जहां कोई जाति वी  भेद नहीं था और आज भी नहीं है।संघ की शाखों में भी यह विभेद नहीं होता है मुझे यह दुख के साथ लिखना पड़ रहा है कि संघ की आत्मा को तोड़ने का विचार भारतीय जनता पार्टी यूजीसी के कानून के रूप में करने जा रही है जो सनातन समाज के लिए घातक सिद्ध हो सकता है, मैं प्रधानमंत्री जी एवं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी से आग्रह करता हूं कि इस कानूनी प्रारूप को तुरंत वापस लिया जाए नहीं तो बाटोगे तो काटोगे को चरितार्थ होने में समय नहीं लगेगा.

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